उत्तर ध्रुव के त्रासद अभियान की कहानी
8 जुलाई, 1879 को सैनफ्रांसिस्को से यूएएस जीनेट नामक जहाज उत्तर ध्रुव की दुर्गम यात्रा पर निकला था। अभियान के आयोजक अखबार मालिक जेम्स गोर्डन बैनेट थे। जीनेट को आर्कटिक की बर्फ से बचाने के लिए तकनीकी तौर पर मजबूत बनाया गया था। उसमें थॉमस एडिसन द्वारा दी गई आर्क लाइट फिट थी। उसके टेलीफोन और टेलीग्राफ उपकरण एलेक्जेंडर ग्राहम बैल ने दिए थे। जहाज में तीन वर्ष की रसद का इंतजाम था। वह कभी वापस नहीं लौटा। उस जहाज की खोज के लिए एक और अभियान चलाया जाता है। हेम्पटन साइड्स की किताब- 'इन द किंगडम ऑफ़ आइस' में इन अभियानों का रोचक ब्यौरा दिया गया है। साइड्स आर्कटिक के विद्वान नहीं है। वे ऐतिहासिक घटनाक्रमों की व्याख्या के लिए जाने जाते है। उनकी पिछली किताब-हैलबाउंड ऑन हिज ट्रेल-मार्टिन लूथर किंग के हत्यारे की खोज से सम्बंधित थी।
साइड्स ने नई किताब में जीनेट की त्रासदी में विविधता के रंग भरे है। इसमें बहादुरी के किस्से और आर्कटिक के जीवनचक्र का विस्तार से जिक्र है। यह किताब एक रोमांचक उपन्यास का एहसास कराती है।
